गुरुपूर्णिमा

गुरुपूर्णिमा

नमन करूँ गुरु देव को, बना दिये इंसान।
परिभाषा इस जीव का, दिए बहुत आसान।।

कलयुग में अब गुरु कहाँ, जैसे थे गुरु व्यास।
वेद निगम को रच दिया, उचित किया है न्यास।।

राह सूझे न गुरु बिना, मन को मिले न चैन।
पंथ दिखाता ग्रंथ है, उसकी भी है वैन।।

मेरा गुरु यह ग्रंथ है, गीता का अब पाठ।
पग-पग पर वो साथ है, मन में बांधो गाँठ।।

जिससे जो भी सीख लूँ, देती उसको मान।
प्रथम गुरु हैं मात- पिता, जो प्रभु का वरदान।।

विद्यालय का एक गुरु, दे पुस्तक का ज्ञान।
जीवन भर गुण साथ है, करती हूँ सम्मान।।

पुष्पा पाण्डेय।

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