रक्षा -बंधन जैसे काव्य-ग्रंथ भाई बहन के प्रेम की शाश्वतता के स्थापित करता है। —डॉ. माया प्रसाद

रक्षा -बंधन जैसे काव्य-ग्रंथ भाई बहन के प्रेम की शाश्वतता के स्थापित करता है। ---डॉ. माया प्रसाद
रक्षा -बंधन जैसे काव्य-ग्रंथ भाई बहन के प्रेम की शाश्वतता के स्थापित करता है।
—डॉ. माया प्रसाद

कवि सुरेन्द्र नाथ सक्सेना जी के तीन प्रबंध काव्य ग्रंथ शांति-दूत, दिव्य लोक ,रक्षा-बंधन का लोकार्पण सह पुस्तक परिचर्चा मनरेसा हाउस के काबिल बुल्के भवन में दिनांक 6 दिसंबर को हुआ। श्री साहित्य कुंज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डॉ माया प्रसाद जी (मुख्य अतिथि), डॉ. अशोक प्रियदर्शी जी (अध्यक्ष) प्रमोद झा जी , बीना श्रीवास्तव जी एवं पूर्व डी.एस.पी. प्रशांत कर्ण, रेणु झा , पूनम रानी तिवारी , प्रतिमा त्रिपाठी जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उनके समाज उपयोगी साहित्य पर समग्र प्रकाश डालते हुए कहा की यह समाज की धरोहर है जो उनके अवसान के बाद और लेखन के लगभग सतर वर्ष बाद उनकी संतति द्वारा समाज को दी जा रही है। अभी कवि सुरेन्द्र के साहित्य व पुस्तकों को साहित्य जगत में सही सम्मान मिलना शेष है। हम इसे पढ़े और इससे प्रेरणा भी ले । इस अवसर पर रेणु मिश्रा त्रिवेदी ,कामेशवर कुमार, राकेश रमण,रेणु बालाधर ,निर्मला करण, सुनीता अग्रवाल, रंजना वर्मा, प्रतिभा सिंह, पुष्पा सहाय आदी ने उनकी कविताओं का पाठ किया । सरस्वती वंदना बिंदु प्रसाद जी ने की ,संचालन मनीषा सहाय व गीता चोबे गूंज जी द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन नीता शेखर जी ने किया।

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