“हिंग्लिश हमारी स्वरचित भाषा है”

“हिंग्लिश हमारी स्वरचित भाषा है”

“स्वरचित” यह शब्द आजकल बड़ा एक्टिव हो गया है। हर कलमधारी, जिसे अक्षर ज्ञान है, वह कापीराइट का साइन लिए फिरता है। हर तरफ़ अपनी ओरिजिनलिटी दिखाने की गहमागहमी है। अरे प्रोपराइटर भी भरे पड़े हैं। “प्रोपराइटर” समझे क्या? अरे प्रोपर्टी नहीं भाई साहब, उस पर बाद में आएंगे। प्रोपराइटर माने जो अपने “इंटरप्राइजेज” का खुद ही मालिक हो।

प्रोपराइटर बोले तो इस शब्द को सुनकर बड़े गर्व की अनुभूति होती है। एक पान वाला भी अपने दुकान के आगे लिखता है- संजू मगही पान प्रोपराइटर। कुछ बोर्ड तो इतने इंटरेस्टिंग होते हैं, जैसे “लवली इंटरप्राइजेज- यहां से आप सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ते हैं!”
एकेडमी का भी बड़ा प्रचलन है। एकेडमी शब्द को कमजोर न समझें। भारत में एकेडमी का मतलब है प्राइवेट घरेलू ट्यूशन। हर अकैडमी हर गली में हर दूसरे घर में यह दावा करती है कि, “आपका बच्चा यहां आएगा तब अपने सुनहरे भविष्य को साथ लेकर जाएगा!” भारत में हिंग्लिश का इतना क्रेज है कि कभी संस्कृत से पैदा हुई अवधि, हिंदी तमिल, मलयालम, बांग्ला, उड़िया जैसी सभी भाषाओं पर यह हिंग्लिश अकेली ही हावी है।

“इंटरप्राइजेज प्रोपराइटर- राजू उर्फ मुन्ना एंड संस!” ऐसे कितने ही प्रतिभावान प्रोपराइटर आपको भारत के हर कोने में मिल जाएंगे। अभी एक नया शगल चल पड़ा है “ग्रेजुएट चायवाला, ग्रेजुएट चाय वाली, एमबीए गरमा गरम फालतू चाय!” “दाताराम छोले कुलचे वाले- ऑपोजिट बस स्टैंड के सामने वाली गली!”

एक दूसरे की भावना समझने के माध्यम को हम भाषा कहते हैं। यह बात हमने बचपन से रटी है और इसको हमने अपने जेहन में, अपने आसपास के जीवन में कुछ इस तरह से उद्धृत किया है कि, हमने एक नई भाषा ही गढ़ ली जिसका नाम है हिंग्लिश।

पहले माता-पिता बच्चों के नाम रखते थे- राधाकांत, महेश्वर नाथ। अब लोग स्वयं अपने नाम रखते हैं जिसके आगे पीछे “यो यो, जो जो, बैड, किंग, एंजेल, नो नो, यस यस, आदि। और हम इन नामों को बहुत ज्यादा इज्जत के तौर पर लेते हैं।

रैपर भी एक नयी प्रजाति का प्रादुर्भाव हुआ है। “तेरी मां ने खिलाया तुझे किस चक्की का आटा; किसने तुझे कोल्डड्रिंक रात को बांटा! येह्ह एह्ह!” और हमारी पूरी की पूरी नई पीढ़ी पागलों की तरह दीवानी सी झूमती थिरकती नजर आती है, इन सुंदर काव्य पाठों पर।

“अब कौन गिनती गिने मात्रा भार और रचे दोहे, जब यो- तो के रैप मुझे मोहे!” लिजीए जी, हमने भी एक सेल्फ मेड रैप आप सबकी खिदमत में पेश कर ही दिया।

स्वरचित
डॉ आकांक्षा चौधरी
रांची झारखंड

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