सफरनामा

कशमकश से भरा, ज़िन्दगी का ये सफ़र

आसान भी थी राहें पर, चुनी तुमने मुश्किल डगर

एक राह, जहां से पथिक पार हुए हैं

एक नहीं, सौ बार हुए हैं

आसान, समतल राहों पर,क्या चलने को तू तैयार है?

या कांटों से भरी राहों की, चुनौतियां तुझे स्वीकार है?

स्वीकार कर, प्रतिकार कर, हो पीड़ा तो चीत्कार

करवार कर, प्रहार कर, बस बैठना ना हार कर
कांटों पे चलते पांव तेरे, लहूलुहान भी होंगे

नज़र ना आएंगे लोग कोई, पथ सुनसान भी होंगे

चिलचिलाती दोपहरी तेरे बदन को पिघलाएगी

अग्नि शिखा भी देख अवसर, जंगलों को जलाएगी

तो बन जा ढीठ, ठोक अपनी पीठ, तू आगे बढ़ता जाएगा

कोई मुश्किल,या बाधा जाए मिल, तू हर्फ ना घबराएगा
भूल जा अंधेरी रात को, हर बात को

नज़रें रख तू सौगात पर

ये चुनौती केवल ललकार नहींप्रश्नचिह्न है तेरे औकात पर               
:- आँचल राज

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