जब रोटी के दो टुकड़ों की बात होती है,
नां जाने भूख कौन कौन सी जगह पर रोती है।

इस रोटी के लिए मां कितना बोझा ढोती है,
फिर कहीं बच्चों को दो वक्त की रोटी नसीब होती है।

सबको खिलाकर ही मां की आत्मा तृप्त होती है,
मां कई बार कई रातें खुद भूखे पेट ही सोती है।

परिवारों में कलह कलेश की वजह रोटी ही तो होती है,
जहां रोटी आराम से मिलती है वहां सुख शांति होती है।

रोटी के लिए ही जीवन में जीने की जंग होती है,
बही विजेता होता है जिसके करीब रोटी होती है।

सरहदों पर भी रोटी की ही बातें होती हैं,
गोलियों की बौछारें इस रोटी के लिए ही होती हैं।

कइयों को कई तरह की विरह होती है,
पर कइयों की विरह रोटी तक ही सीमित होती है।

हर जीव के लिए रोटी ही सब कुछ होती है,
सुबह घोंसला छोड़कर सभी को रोटी की ही तलाश होती है।

रोटी के लिए धरती और हर वनस्पति रोती है,
इन सबको भी खाद रूपी रोटी की ही जरूरत होती है।

इस रोटी के बिना कभी धरती भी बांझ हो जाती है,
बादल वर्षा परोसता है फिर धरती की प्यास शांत होती है।

रोटी के बिना हर बात अधूरी खोटी सी होती है,
रोटी मिल जाए फिर ही सबकी बात पूरी होती है।

भूखे पेट तो प्रभु की पूजा भक्ति भी नहीं होती है,
प्रभु को भोग लगाने में भी रोटी की ही शान होती है।

भूखा रहने से तो भूख और भी बढ़ निकलती है,
हर किसी को भर पेट रोटी मिले यह प्रभु से बिनती है।

राजेश शर्मा अगस्त्य

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