बाल दिवस विशेष

डिजिटल और वीडियो गेमिंग – आधुनिक नशा
खेल खेलना बुरा नहीं है, लेकिन अगर हम इंतजार करते हैं जब तक कि यह नशे की लत नहीं बन जाता है, तो इसके परिणाम हमें ही भुगतने होंगे। इसकी वजह से बच्चों के मानसिक विचार बदलकर उस खेल जैसे हिंसक विचार बनते जा रहे है। जो बींच मे आए उसे मार दो, जैसे उस खेल मे होता है की, बाधा बनकर जो बींच मे आता है उसे गोली मारकर हटा दिया जाता है। बच्चों की मानसिकता बदल रही है। एक समय खाना खाना भूल जाते हैं लेकिन मोबाइल चार्ज करना नहीं भूलते। रात-रात भर जागकर आँखें खराब कर लेते हैं। इस खेल के कारण वे मैदान पर बाहर जाना और खेलना, दूसरों से बात करना भूल गए है। शराबी व्यक्ती जैसे बार बार शराब के पास भागता है, ऐसा ही कुछ इन बच्चों के साथ हुआ है। हमें इस संबंध में सावधान रहना चाहिए। अपने बच्चे को ऐसे शौक या व्यसनों से मुक्त रखना चाहिए। हमें ध्यान देना चाहिए कि वह क्या करता है या क्या नहीं करता है। अपने बच्चे को इस तरह के हिंसक मोड़ लेने से रोकना हमारे हाथ में है। मोबाइल का सही इस्तेमाल करना सिखाएं। लेकिन आजकल, जब माता-पिता काम पर जाते हैं, तो इन अच्छी आदतों को सीखने में उनकी मदद करने वाला कोई नहीं होता है। इसलिए अपने बच्चे को अपना अधिकांश समय दें। अन्यथा, वह जिस व्यक्ति से मिलता है, उसकी संगत उसे आपसे दूर ले जाएगी, जैसा कि वह मोबाइल गेम्स कर रहा है।

अगर हम समय से नहीं जागे तो हमारे बच्चे हमसे बहुत दूर हो जाएगे, और हमें समझ में भी नहीं आएगा।
बच्चों को डिजिटल और वीडियो गेमिंग की जगह शारीरिक व्यायाम की ओर शिक्षित करें।

© गोरी सिंह ( गाजीपुर यूपी 61 )

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