फलदार छायादार वृक्ष ही झुके रहते हैं,

बचपन से सुनती आई थी कि फलदार छायादार वृक्ष ही झुके रहते हैं,यही मनुष्य के संदर्भ में भी सत्य है और इसका साक्षात अनुभव मिला, महिला काव्य मंच जैसे अनूठे अंतरराष्ट्रीय मंच के संस्थापक परम आदरणीय नरेश गुप्ता ‘नाज़’ सर और उनकी प्रेरणा और मंच की मार्गदर्शक नियति मैडम को देखने,सुनने और मिलने के बाद।18 नवंबर महिला काव्य मंच की झारखंड इकाई का वार्षिकोत्सव,जिसका शानदार अनुशासित आयोजन आदरणीया सारिका भूषण जी की अप्रतिम कार्य कुशलता की मिसाल बन गया और 19 नवंबर श्री साहित्य कुंज के तत्वावधान में आयोजित नाज़ सर और नियति मैडम का सम्मान समारोह सह काव्यगोष्ठी का शानदार आयोजन आदरणीया मनीषा जी द्वारा। ये दो दिन हमेशा के लिए जेहन में अंकित हो गया। आप दोनों की सरलता ने,सहजता ने हमें भाव विभोर कर दिया।
एक विशिष्ट व्यक्तित्व, साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर के समक्ष काव्यपाठ करना और सराहना पाना एक जीवनपर्यंत याद रहने वाली उपलब्धि बन गयी। मुझे अपनी प्रकाशित एकल काव्यसंग्रह “कल आज और कल” तथा एकल कहानी संग्रह “पंख अरमानों के” सर को भेंट करने का सुअवसर भी मिला।

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