कठिन डगर है कई रास्ते, पथिक पथ का ज्ञान करना
पग पग पर है कई भुलावे , पथिक मन में ध्यान रखना

चौराहे दोराहे मिलते , सबकी अपनी है पहचान
सोच समझ कर आगे बढ़ना ,हर पथ से तू अंजान

कोई तुझको पास बुलावे , कोई तुझे पास बिठाए
कई तरह के लालच देते ,कई किस्से तुम्हें सुनाए

धन वैभव क्या मंजिल तेरी , ढूंढ रहा क्या तू सम्मान
पद की लालसा क्या तुझमें , किसे समझता है अपमान

अहंकार क्या पाले मन में , बल बुद्धि का क्या अभिमान
भोग विलास क्या जीवन तेरा ,नित करता तू मदिरापान

दुष्कर्मों का जाल बड़ा हैं ,क्या बन जाता तू शैतान
कामी-क्रोधी बन जाता तू , क्या बन जाता तू हैवान

माया-मोह का जाल बड़ा है ,इसमें फँसता हैं इंसान
जीवन व्यर्थ गँवाता अपना ,करता है अपना नुकसान

इस जीवन का अर्थ यही है, पथ में मिले तुझे भगवान
दया प्रेम मन में भरा हो ,हँसते-हँसते निकले प्राण

शांति संयम संतोषी जीवन , जिस पथ पर तू पायेगा
हर कर्म में परोपकार हो , जीवन सफल हो जाएगा

श्याम मठपाल ,उदयपुर

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