देखता हूँ कब तक सताते हो

देखता हूँ कब तक सताते हो

बहुत परेशान करते हो और बहुत सताते हो,
आप ही का अंश हूँ, देखता हूँ कब तक रुलाते हो।

सामने सब कुछ दे कर भी मुझे इतना भगाते हो,
आपकी तरह ही ज़िद्दी हूँ, देखता हूँ कब तक तड़पाते हो।

सारे जहाँ में व्याप्त हो फिर भी अकेला कर देते हो,
आपकी तरह की अडिग हूँ, देखता हूँ कब तक सज़ा देते हो।

सब कुछ जान बूझ के करके भी कुछ न जताते हो,
आपकी तरह ही भोला हूँ, देखता हूँ कब तक बहलाते हो ❣️❣️🙏🙏

शिवांश त्रिपाठी (गाजीपुर)

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