ओमप्रकाश पाण्डे

बच्चों की कहानियाँ ( पहली कहानी) — ओमप्रकाश पाण्डेय

  1. चंदा मामा
    माँ देखो अभी तक चांद नहीं निकला, कितना देर हो गया, अभी तक तो निकल जाना चाहिए. बालू ने अपनी माँ, जो कि रसोई में खाना बना रही थी, कहा. माँ मुस्करा दी, बोली क्या बात है बेटा आज चंदा मामा की बड़ी चिंता हो रही है, निकलेगें अपने समय पर. माँ ने बालू को बहलाने के लिए कहा.
    बालू बोला बात तो तुम सही कह रही हो लेकिन बाहर अंधेरा है, अगर चांद निकल जाये तो थोड़ी रोशनी हो जाती तो मैं बगिया के उस तरफ काकी के पास चला जाता. काकी के पास क्यों जाना है बेटा, माँ ने पूछा. काकी से कहानी सुनना है, तुम तो काम में ही लगी रहती हो. माँ बोली बेटा किसी को काम भी तो करना चाहिए नहीं तो खाना कौन बनायेगा.
    अच्छे माँ चांद रोज एक ही समय क्यों नहीं निकलता, और कभी तो लगातार निकलता ही नहींं, ऐसा क्यों? देखो बेटा यह दुनिया बहुत बड़ी है, चंदा मामा को हर जगह जाना पड़ता है. रास्ते में किसी ने थोड़ी देर के लिए रोक लिया, तो उन्हें थोड़ी देर हो जाती है और जब दुनिया के दूसरी तरफ चले जाते हैं, तो फिर हम लोगों के तरफ नहीं आ पाते,
    माँ यह दुनिया तो एक ही है, फिर दूसरी तरफ कहाँ है? बालू ने पूछा.
    बेटा यह दुनिया या कह लो पृथ्वी चपटी नहीं है, बल्कि तुम्हारे गेंद की तरह गोल है और यह लगातार अपनी धुरी पर घूमती रहती है और साथ ही साथ सूर्य भगवान की परिक्रमा भी करती रहती है, इसलिए कभी कई दिनों तक चंदा मामा दिखाई नहीं पड़ते और जब दिखाई भी पड़ते हैं तो अलग अलग समय पर . तो यह बात है, बालू ने कहा और अपनी काकी के पास चला गया.
    ( यह मेरी मौलिक रचना है —- ओमप्रकाश पाण्डे)

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