‘कविता चली मॉल की ओर ‘ कार्यक्रम सफल सम्पन्न

‘कविता चली मॉल की ओर ‘ कार्यक्रम सफल सम्पन्न
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प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच और साहित्य 24 की ओर से रिलायंस मॉल द्वारका में ‘कविता चली मॉल की ओर’ कार्यक्रम सफल सम्पन्न हुआ।
महाकवि डॉ कुंअर बेचैन जी के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक डॉ चन्द्रमोहन भगत ने एवं संचालन अन्तरराष्ट्रीय कवयित्री डॉ कीर्ति काले ने किया।
महाप्राण सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला एवं महीयसी महादेवी वर्मा के साथ रह चुकीं हिन्दी की वरिष्ठतम कवयित्री श्रीमती प्रमिला भारती जी का जन्मदिन भी इस कार्यक्रम के अन्तर्गत भव्य स्तर पर मनाया गया।

डॉ कीर्ति काले, श्रीमती प्रमिला भारती,श्रीमती वन्दना कुंअर रायजादा,श्री संदीप शजर, ओमप्रकाश कल्याणे एवं डॉ चन्द्रमोहन भगत जैसे जाने माने कवियों ने अपने सरस एवं ओजस्वी काव्यपाठ से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

दीपक प्रज्वलन के पश्चात श्रीमती वन्दना कुंअर रायजादा की सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ हुए इस अनूठे कार्यक्रम में संस्था के महासचिव हरिप्रकाश पाण्डेय ने संस्था की उपलब्धियों एवं उद्देश्यों के सम्बन्ध में संक्षिप्त जानकारी देते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
प्रीति त्रिपाठी ने महाकवि डॉ कुंअर बेचैन जी का एक गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर वातावरण को भावुक बना दिया।

नन्दिनी श्रीवास्तव ने सम्मानित कवयित्री श्रीमती प्रमिला भारती जी का विस्तृत परिचय दिया।

श्री जगदीश मित्तल,डॉ प्रवीण शुक्ल,निर्दोष शर्मा, शरद रायजादा,बलजीत कौर तन्हा, सुषमा भंडारी,पंकज शर्मा,पी के आजाद,सरिता जैन, प्रीति त्रिपाठी, नन्दिनी श्रीवास्तव,सरिता जैन,उर्मिला शर्मा,अभिषेक तिवारी,
अभिषेक तिवारी,पंकज शर्मा, करिश्मा सोनी, ध्रुव कुमार गुप्ता, विनोद श्रीवास्तव, अनिरुद्ध शुक्ल,स्वाती खानवलकर, सोनिया अक्स, श्रीकांत काले, रागिनी पाण्डेय,सुषमा पंवार,प्रज्ञा काले,मीनाक्षी शर्मा आदि की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जितनी कुर्सियाँ थीं उससे अधिक श्रोता उपस्थित थे।

साहित्य 24 ओटीटीटी का इस अवसर पर लॉन्च किया गया।साहित्य 24 की तरफ कवियों की फोटो और उनकी काव्य पंक्तियां लिखी हुई टी शर्ट वितरित की गई।

कवियों के चित्र और काव्य पंक्तियों के साथ आकर्षक कॉफी मग भी साहित्य24 के द्वारा दिए गए।

सारे श्रोताओं को उपहार भेंट किए गए।
और भी बहुत कुछ था जिसने ‘कविता चली मॉल की ओर’ को अन्य कार्यक्रमों से विशिष्ट बना दिया।

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